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از قول
من و تو قصه ها مي گويد |
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1-آن چيست كه بي زبان سخن مي گويد |
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بي پرده ز كار اين و آن مي گويد |
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با آن كه در او نيست نه دندان و نه لب |
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بي هدف ره مي برد با قلب خون |
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2- چيست آن ، كز چشمه اي آيد برون
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مي شود از سنگ سختي سر نگون |
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مدتي بر دشت خشكي چون برفت |
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| بيرون و درون شهر جايي
دارد |
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3- آن چيست كه ارغوان قبايي
دارد |
| مانند دم موش
پايي دارد. |
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گرد است و مدور است و تاجش بر سر |
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صد پاره تنش ، ولي ز يك پايه نگون |
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4-
آن چيست كه روز مي نمايد شبگون |
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همچون دل عاشقان فرو ريزد خون |
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چون دست به او نهي ز اندازه فزون |
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| اندر وسطش كشتي قير اندوده |
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5-
جامي است در او آب خوش و آسوده |
| بر
جاي نشسته و جهان پيموده |
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كشتي باني در آن به رنگ دوده |
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خود جامه همي بافد و او باشد عريان |
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6-آن چيست كه خودريسد و خود بافد جامه |
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| پوست در پوست گرد يكديگر |
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7-
چيست آن گرد گنبد بي در |
| رخش
از آب ديده گردد تر |
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هر كه بگشايد اين معما را |
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گاهي حلال و طيب ، گاهي حرام مطلق |
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8-
آن چيست گرد و كوچك ، آويز و معلق |
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| گرد است و دراز و در ندارد |
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9-آن چيست كه پا و سر ندارد |
| جز
نام دو جانور ندارد |
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اندر
شكمش ستارگانند |
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اندام ظريف چون صنوبر
دارد |
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10-آن چيست قباي زرد در بر دارد |
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تلخ
است ولي طعمي چو شكر دارد |
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زرد است و معطر آيد به مشام |
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| با
هزاران
سوار مي گرديد |
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11-
چيست آن پادشاه هفت اقليم |
| آمد
و فوج شاه
در پيچيد |
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ناگهان
يك سوار زرد نقاب |
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چار
پاست ، نه كه
گاو است |
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12-
سخت است , نه كه سنگ |
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بيابان گرد است ، نه
كه مرد است |
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تخم ريز است ،
نه كه مرغ است |
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| كليد آهنين
قفلش گشايد |
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13-
كدام است گنبدي
كه در ندارد |
| ز
هر بچه
دو صد مادر بزايد |
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هزاران بچه دارد
در شكم بيش |
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كه
ندارد
به آشيانه
قرار |
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14-
چيست آن مرغ
آتشين منقار |
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و
قنا عذاب
النار ؟ |
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شب و روز اندر
آب مي گويد |
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| سرخ
و سبز و
سپيد پوشيده |
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15-
چيست آن
لعبت پسنديده |
| با
دو صد احترام
خوابيده ؟ |
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در ميان
دو كاسه چوبين |
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رخت
سيه و سبز
كلاهي دارد |
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16-
آن چيست كه در برگ پناهي
دارد |
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من
در عجبم كاين چه
گناهي دارد؟ |
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پوستش بكنند و سينه اش چاك كنند |
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| گر
آب تني كني، تنش
آب شود |
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17-
آن چيست كه در سه و قت كمياب شود |
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سرد شود ، زندگي
از سر گيرد؟ |
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گر گرم شود گريه كند
تا ميرد |
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از
خمي هر
دو سر به هم دارد |
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18-
اين چه باشد كه
پشت خم دارد |
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صد
مني را
به پشت بر دارد ؟ |
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وزن او نيست خود
به صد مثقال |
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| پرنيان پيكر و آهن دل و فولاد پر
است ؟ |
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19-آن چه مرغيست تا اوج هوا رهسپراست |
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كاندرين صحرا بديدم
يك عجايب جانور |
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20-يك معما از تو پرسم اي حكيم پر هنر |
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پاي
او مانند اره ، شير سينه، اسب سر |
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مور چشم ومار دم كركس پرو عقرب شكم |
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| نيم
پر شد پر تهي ،
يعني چه چيز ؟ |
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21-
يك معما با تو دارم، اي حكيم با تميز |
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مرغ
آتشخوارم و آتش پر و بال من است |
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22-بلبل اين باغم واين باغ بستان من است |
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هر
كه حل كرد اين معما پيرو استاد من است |
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استخوانم نقره و اندر شكم دارم طلا |
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| كه
آتش در ميان آب
مي گشت |
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23-
عجايب صنعتي ديدم در اين دشت |
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دو
اسم زنده دارد
از دو حيوان |
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24-
عجايب لعبتي زرد است و بي جان |
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| رعنا پسران شوخ
و دلكش دارد |
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25-
شيراز پري رخان
مهوش دارد |
| بنگر كه دلم
از تو چه خواهش دارد |
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از هر سر مصرعي حروفي
بردار |
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نه
در دارد
نه ديوار و
حصاري |
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26-
عجايب
گنبد والا
تباري |
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درونش هست
لشكر بيشماري |
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بنازم قدرت
پروردگاري |
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| پريرويان
به بستان تازه ديدم |
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27-
عجايب صنعت
ناديده ديدم |
| به
يك محمل
دو صد دردانه ديدم! |
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چو دست بردم گل از باغش بچينم |
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همه
چادر سفيد
سينه بلوري |
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28-
از آن بالا مياد يك دسته
حوري |
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| چون
به سن سي رسد بچه شود! |
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29-
دختري چارده ساله
بالغ شود |
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پرش
سيب و
گلابي |
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30-دستمال
آبي
آبي |
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| چشمه آبش را ببين شط فراتش را
ببين |
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31-
گنبد سرخ چمني ،توش گل سرخ يمني |
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لب
تا لب آن ميان
زنجير است |
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32-
در خانه ما
درخت انجير است |
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آبش
بخورم كه گوئيا چون
شير است! |
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خنجر بكشم ميانه را
پاره كنم |
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| اهل
حقه
تمام سر بسته |
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33-
حقه اي
ديده ايم در بسته |
| صاف
و رنگين
به يكديگر بسته! |
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همه ياقوت رنگ
و لعل صفت |
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داس
ظفرم چو كشت
دولت دروند |
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34-من خود كج و راستان زمن راست روند |
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از
هر طرفي
زمزمه زه شنوند! |
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پشت از پي خدمت چه كنم خم كه و مه |
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| زنده نبود
تا نكني زاتش بريان |
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35-
چيزي چه بود مرده به يك كنج نهاده |
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سرش
تا
نبري نگويد خبر ؟ |
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36-چه چيز است
، مرغي است بي بال و پر |
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صد پاره تنش بود
ولي به يك پاي نگون |
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37- آن چيست كه روز مي
نمايد شبگون |
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همچون عاشق
زچشم او ريزد خون؟ |
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چون
ناز كني تنش ز اندازه فزون |
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به شباهت
نظير
يكدگر است |
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38- آن چه باشد
كه زرد مثل زر است |
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معدنش
در ميان دشت و در است ؟ |
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قيمت آن بسي گران
نبود |
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پاي او
غرق در دل
خاك است |
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39- آن چه باشد كه
سر بر افلاك است |
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گوشت شيرين
و استخوان چاك است ؟ |
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رنگ او
سرخ و زرد و گاه سياه |
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اندر صف
مردان خدا
جا دارد |
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40- آن چيست كه جا به كوه و
صحرا دارد |
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سيصد
سر و ده شكم دو صد پا دارد |
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از هيبت او
جمله بلرزد عالم |
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مشاطه
زلف
دلبران است |
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41- آن چيست كه پيك
عاشقان است |
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رقص
چمن از نواي
آن است ؟ |
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خنديدن
گل ز بوسه
اوست |
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روز و
شب گردد و قدم
نزند |
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42- چيست گردنده يي
كه دم نزند |
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برف بارد
و ليك
دم نزند ؟ |
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نعره او به سان
شير بود |
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اهل حقه ،
تمام
سر بسته |
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43- حقه اي
ديده ايم در
بسته |
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صاف و
رنگين به يكديگر
بسته! |
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همه
ياقوت رنگ و لعل صفت |
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وز آتش
سرخش تاج و افسر
دارد |
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44- اين چيست كه
تاج نقره بر سر دارد |
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بر گردنش از
هر طرفي زنجير است ؟ |
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نا كرده گناه روي او چون
قير است |
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جفتند
ولي
زهم جدايند |
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45- يك جفت
كبوترند
ابلق |
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از
كالبدشان
برون نيايند |
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پرواز
كنند
گرد عالم |
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برسر هر شاخ او سه دختر
افسونگر است |
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46- اژدري ديدم كه او چارشاخ
اندر سراست |
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هر پسر را بيس و چار فرزند
ديگر درخور است |
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برسر هردختري بنشسته
باشد سي پسر |
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اندر كف
مهوشان
موزون گردد |
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47- آن چيست كز او حسن بت افزون
گردد |
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چون آب بدو رسد
همه خون گردد |
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سبز است
تنش تا نرسد آب بدو |
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كهربا پيكر و آدم دم و
فولاد سر است؟ |
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48-آن چيست كه برسينه خصمش
گذرست |
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بار دوم
كه زاد
جان آورد! |
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49- بار اول
كه زاد بي جان
بود |
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در يك گلاب پاش دو
رنگ گلاب چيست ؟ |
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50- دارم سوال خواجه بفرما
جواب چيست |
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آتش بدو رسيدن و
بستن ، جواب چيست؟ |
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سرماي زمهرير كه يخ بست او نبست |